अमेरिका की डी.सी. सर्किट अपीलीय अदालत ने 2-1 के फैसले से ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफ चल रही ‘अवमानना’ कार्यवाही को रोक दिया है। यह मामला 1798 के एलियन एनेमीज़ एक्ट के तहत सैकड़ों वेनेज़ुएलाई प्रवासियों को अल सल्वाडोर के अधिकतम सुरक्षा वाले जेल में भेजने से जुड़ा है।

अमेरिकी जिला न्यायाधीश जेम्स बोसबर्ग ने मार्च 2025 में आदेश दिया था कि इन निर्वासनों को तुरंत रोका जाए, क्योंकि यह प्रभावित व्यक्तियों के ‘न्यायिक प्रक्रिया के अधिकार’ का उल्लंघन हो सकता है। लेकिन आदेश के बावजूद कुछ विमान पहले ही उड़ान भर चुके थे और निर्वासन जारी रहा। अप्रैल में बोसबर्ग ने इसे अदालत की अवमानना मानते हुए आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दी थी।

ट्रंप नियुक्त न्यायाधीश ग्रेगोरी कैटसस और नयोमी राव ने बहुमत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बोसबर्ग के मूल आदेश को रद्द करने के बाद उनके पास अवमानना कार्यवाही का अधिकार नहीं था। कैटसस ने आदेश में अस्पष्टता का हवाला दिया, जबकि राव ने इसे राष्ट्रपति की विदेशी मामलों की शक्ति में “गंभीर हस्तक्षेप” बताया।

ओबामा नियुक्त न्यायाधीश नीना पिलार्ड ने असहमति जताते हुए कहा कि सरकारी अधिकारियों ने जानबूझकर अदालत के आदेश की अवहेलना की और यह न्याय प्रणाली के लिए खतरनाक उदाहरण है।

यह फैसला अपील योग्य है और इसे पूर्ण पीठ या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। अटॉर्नी जनरल पामेला बॉन्डी ने इसे “ट्रंप एजेंडा की बड़ी जीत” बताया, जबकि एसीएलयू के वकील ली गेरलेंट ने निराशा व्यक्त करते हुए आगे कानूनी कदम उठाने के संकेत दिए।