अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा भू-राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने हाल ही में अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की को एक संदेश दिया: रूस को डोनेट्स्क सौंप दीजिए, ताकि युद्ध समाप्त हो सके।

यह मुलाकात फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण आक्रमण के बाद पहली अमेरिका-रूस शिखर बैठक थी, जो करीब तीन घंटे चली।

पुतिन का प्रस्ताव: डोनेट्स्क के बदले युद्ध रोकने का वादा

जानकारी के अनुसार, पुतिन ने सुझाव दिया कि अगर यूक्रेन पूरा डोनेट्स्क क्षेत्र रूस को दे दे, तो वह मौजूदा फ्रंटलाइन को स्थिर कर युद्ध रोकने पर सहमत हो जाएगा। फिलहाल, रूस डोनेट्स्क प्रांत का लगभग 75% और पूरे यूक्रेन का लगभग पांचवां हिस्सा नियंत्रित कर चुका है।

ट्रंप ने इस प्रस्ताव को “व्यावहारिक” बताते हुए ज़ेलेंस्की से कहा:
“रूस बहुत बड़ी ताक़त है, और वे नहीं।”

ज़ेलेंस्की का सख्त इंकार

ज़ेलेंस्की ने साफ़ शब्दों में किसी भी तरह की भौगोलिक रियायत देने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि यूक्रेन का संविधान उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यूक्रेन को एक स्थायी शांति चाहिए, न कि केवल एक अस्थायी विराम।

ज़ेलेंस्की ने सुरक्षा गारंटी की भी मांग दोहराई, ताकि रूस भविष्य में दोबारा हमला न कर सके।

यूरोप का रुख़: डील हां, ज़मीन नहीं

यूरोपीय देशों ने ट्रंप की पहल का स्वागत तो किया, लेकिन साफ़ कहा कि यूक्रेन की सीमाओं पर कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा:
“जब तक पुतिन का हमला नहीं रुकता, हम रूस पर दबाव बनाए रखेंगे।”

इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने एक सामूहिक सुरक्षा क्लॉज (NATO के आर्टिकल 5 जैसा) का सुझाव दिया, जिससे यूक्रेन को गारंटी मिले कि अगर दोबारा हमला होता है, तो अमेरिका और यूरोप तुरंत मदद करेंगे।

पुतिन के लिए क्यों बड़ी जीत?

पुतिन के लिए ट्रंप से मुलाकात अपने आप में एक कूटनीतिक जीत है। पश्चिमी देशों से अलग-थलग पड़ने के बाद, यह वार्ता उन्हें वैधता का संकेत देती है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसा कोई भी समझौता पुतिन के “सम्मान” पर निर्भर होगा, जो जोखिम भरा है।

आगे क्या होगा?

ट्रंप ने संकेत दिया है कि वाशिंगटन में ज़ेलेंस्की से सोमवार को होने वाली बैठक के बाद एक त्रिपक्षीय बैठक हो सकती है। हालांकि पुतिन के अधिकारियों ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है।

फिलहाल, ज़ेलेंस्की का रुख़ स्पष्ट है:
“कोई भू-भाग नहीं देंगे, कोई समझौता नहीं।”

दूसरी तरफ़, मोर्चे पर लड़ाई जारी है और दोनों पक्ष रोज़ाना हवाई हमले कर रहे हैं। ऐसे में दुनिया की नज़रें ट्रंप की मध्यस्थता पर टिकी हैं—क्या यह यूरोप के सबसे ख़तरनाक युद्ध को ख़त्म कर पाएगी या सिर्फ़ तनाव और बढ़ाएगी?