सरकार सोमवार को संसद में आयकर विधेयक 2025 का नया संस्करण पेश करेगी, जिसमें बीजेपी सांसद बैजयंत जय पांडा की अध्यक्षता वाली चयन समिति की अधिकांश सिफारिशें शामिल होंगी। यह विधेयक 1961 के पुराने आयकर अधिनियम की जगह लेगा, जिसमें अब तक 4,000 से अधिक संशोधन हो चुके हैं और जो अत्यधिक जटिल हो गया है।

पांडा के अनुसार, नया कानून कर प्रावधानों को लगभग 50% तक सरल करेगा, जिससे आम करदाताओं और सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए इन्हें समझना आसान होगा। इसका सबसे बड़ा लाभ छोटे व्यवसायियों और मध्यम वर्ग के लोगों को मिलेगा, जो अक्सर जटिल कर ढांचे और कानूनी विवादों से जूझते हैं।

वित्त अधिनियम 2025 के तहत धारा 87A में कर छूट की आय सीमा ₹7 लाख से बढ़ाकर ₹12 लाख कर दी गई है (नई कर व्यवस्था – धारा 115BAC के तहत)। अधिकतम छूट राशि ₹25,000 से बढ़ाकर ₹60,000 कर दी गई है, और ₹12 लाख से थोड़ी अधिक आय पर भी मार्जिनल रिलीफ मिलेगा।

चयन समिति की प्रमुख सिफारिशों में ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि के बाद भी बिना जुर्माना TDS रिफंड पाने की सुविधा और धार्मिक व चैरिटेबल संस्थानों को गुमनाम दान पर कर छूट जारी रखना शामिल है।

यह विधेयक भाषा और संरचना को सरल बनाने, बड़े नीति बदलाव से बचने और कर दरों को स्थिर रखने के सिद्धांतों पर आधारित है। मध्यम वर्ग पर कर बोझ घटने से घरेलू खपत, बचत और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे भारत की प्रत्यक्ष कर प्रणाली अधिक न्यायसंगत और प्रभावी बनेगी।