स्पेसएक्स
के सीईओ एलन मस्क
ने मंगल मिशन की
समयसीमा बदलते हुए अब 2028 में
बिना मानव वाला और
2030 में मानवयुक्त स्टारशिप लॉन्च का लक्ष्य रखा
है। यह बदलाव तकनीकी
बाधाओं, जैसे बार-बार
की स्टारशिप विफलताएं और अंतरिक्ष में
ईंधन भरने की धीमी
प्रगति, के कारण हुआ
है।
इस वर्ष की शुरुआत
में मस्क ने 2026 के
अंत तक पहला बिना
मानव वाला मंगल मिशन
संभव बताया था, बशर्ते कि
उस समय तक ऑर्बिटल
रिफ्यूलिंग (कक्षा में ईंधन भरने)
की तकनीक पूरी तरह तैयार
हो जाए। लेकिन फ़्लाइट-9
के दौरान ऊपरी चरण के
स्टारशिप के पुनः प्रवेश
में विफल होने और
ज़ीरो-ग्रैविटी ईंधन भरने की
जटिलताओं ने इस लक्ष्य
को लगभग असंभव बना
दिया।
नई योजना के अनुसार, पहला
बिना मानव वाला स्टारशिप
मंगल मिशन अब लगभग
साढ़े तीन साल बाद
होगा और मानवयुक्त उड़ान
लगभग दो साल बाद।
यह बदलाव मंगल यात्रा की
कठिन तकनीकी चुनौतियों और जीवन-समर्थन
प्रणाली, हीट शील्ड की
मजबूती और स्वचालित लैंडिंग
क्षमताओं पर चल रहे
कार्य को दर्शाता है।
ऑर्बिटल
रिफ्यूलिंग अभी भी सबसे
बड़ी बाधा है। मंगल
की लंबी यात्रा और
लैंडिंग के लिए स्टारशिप
को पृथ्वी की कक्षा में
कई टैंकर उड़ानों से ईंधन भरना
होगा। इसके अलावा, मस्क
हीट शील्ड सुधार और लॉन्च टॉवर
के "चॉपस्टिक" आर्म से बूस्टर
रिकवरी जैसी तकनीकों को
प्राथमिकता दे रहे हैं,
जो लागत कम करने
और पुन: उपयोग के
लिए अहम हैं।
हालाँकि
यह देरी मिशन को
दशक के अंत तक
खिसका देती है, लेकिन
मस्क का लक्ष्य अब
भी नासा की तुलना
में तेज़ है। स्पेसएक्स
लगातार परीक्षण, असफलताओं से सीखने और
तकनीकी उन्नयन के साथ मंगल
की राह पर आगे
बढ़ रहा है।
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