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भारतीय लहजे की नकल पर मचा बवाल, इन्फ्लुएंसर पर लगा ‘कैज़ुअल रेसिज़्म’ का आरोप

एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को उस वक्त भारी आलोचना का सामना करना पड़ा जब उसने अमेरिका में शॉपलिफ्टिंग के आरोप में गिरफ्तार की गई एक भारतीय महिला के लहजे की नकल करते हुए एक वीडियो पोस्ट किया।

वीडियो में इन्फ्लुएंसर ने उस महिला की बातों की नकल की, जो पुलिस से पूछ रही थी कि क्या वह चुराए गए सामान की कीमत चुका सकती है। इस क्लिप के वायरल होते ही भारतीय मूल की कंटेंट क्रिएटर कैसेंड्रा जेरोम ने इसे "कैज़ुअल रेसिज़्म (अनजाने में किया गया नस्लीय मज़ाक)" करार दिया।

लहजा मज़ाक नहीं, पहचान है”

कैसेंड्रा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे लहजे को मज़ाक का केंद्र बना देना कई बार असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं कहती कि स्टीरियोटाइप कभी मज़ेदार नहीं हो सकते। मैं भी इंसान हूं और मुझे ह्यूमर पसंद है। लेकिन जब मज़ाक सिर्फ इस बात पर हो कि कोई कैसे बोलता है, तो वह अज्ञानी प्रतीत होता है।”

उनका मानना है कि यदि लहजे का उपयोग सटीक संदर्भ में और समझदारी से किया जाए तो वह प्रभावी हो सकता है, लेकिन केवल मज़ाक बनाने के लिए किसी की भाषा शैली को निशाना बनाना उचित नहीं है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

कैसेंड्रा के वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया। कई यूज़र्स ने अपनी निजी कहानियां साझा कीं, जहां उन्हें भी लहजे को लेकर मज़ाक का सामना करना पड़ा था।

एक यूज़र ने लिखा, “भारतीय लहजों के कई रूप हैं, लेकिन लोग सिर्फ एक ही ओवरऐक्टिंग वाला संस्करण कॉपी करते हैं।”

एक अन्य ने कहा, “दूसरों से सम्मान की उम्मीद करने वाले खुद दूसरों की पहचान का मज़ाक उड़ाते हैं। ये दोहरापन कब खत्म होगा?”

यह विवाद एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि ह्यूमर और अपमानजनक मज़ाक के बीच की सीमा कहां है। लहजा किसी की भाषा नहीं, उसकी पहचान का हिस्सा है, और इसका सम्मान होना चाहिए — सिर्फ हंसी का साधन नहीं बनना चाहिए।