संघ
लोक सेवा आयोग (UPSC) ने एक अभिनव
पहल ‘प्रतिभा सेतु’ शुरू की है,
जिसका उद्देश्य उन अभ्यर्थियों को
वैकल्पिक रोजगार अवसर उपलब्ध कराना
है जो यूपीएससी की
कठिन परीक्षा के लिखित और
साक्षात्कार चरण पार कर
चुके हैं, लेकिन अंतिम
मेरिट सूची में स्थान
नहीं बना पाए।
इस पोर्टल के माध्यम से
सत्यापित संस्थाएं ऐसे अभ्यर्थियों के
विवरण तक पहुंच सकती
हैं और उन्हें विभिन्न
पदों के लिए नियुक्त
कर सकती हैं। इसमें
सिविल सेवा, इंजीनियरिंग सेवा, संयुक्त चिकित्सा सेवा जैसी परीक्षाएं शामिल
हैं। वर्तमान में 113 संगठन इस मंच से
जुड़ चुके हैं और
इसे विश्वसनीय मानव संसाधन स्रोत
मान रहे हैं।
जन
खुलासा योजना से इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म तक
2016 में
शुरू की गई जन
खुलासा योजना के अंतर्गत अभ्यर्थियों
का डेटा वेबसाइट पर
प्रकाशित किया जाता था।
प्रतिभा सेतु ने इसे आगे
बढ़ाकर एक सक्रिय भर्ती मंच बना दिया है,
जहां नियोक्ता सीधे उम्मीदवारों से
संपर्क कर सकते हैं।
यह राष्ट्रीय करियर सेवा पोर्टल से जुड़ा हुआ
है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
महत्त्व
और आंकड़े
हर साल 10 लाख से अधिक
उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा देते
हैं, लेकिन केवल 0.3% ही साक्षात्कार तक
पहुंचते हैं। वित्त वर्ष
2021 से 2025 के बीच 52,910 अभ्यर्थी इंटरव्यू
तक पहुंचे, लेकिन केवल 33,950 का चयन हुआ।
शेष प्रतिभा को अब प्रतिभा
सेतु के माध्यम से
उद्योग, शिक्षण संस्थान, थिंक टैंक और
स्टार्टअप्स तक पहुंचाया जा
रहा है।
सरकारी
समर्थन
केंद्रीय
राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे "प्रतिभा
के उपयोग का सार्थक द्वार"
बताया। उन्होंने कहा कि यह
मंच उन अभ्यर्थियों के
लिए अवसर खोलता है
जो अंतिम चरण में मामूली
अंतर से रह जाते
हैं।
परिधि
और सीमाएं
यह पहल अधिकांश यूपीएससी
परीक्षाओं को कवर करती
है, लेकिन राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, नौसेना अकादमी और कुछ विभागीय
प्रतियोगिताएं इसमें शामिल नहीं हैं।
प्रभाव
और भविष्य
यूपीएससी
के शताब्दी वर्ष (2026) की ओर बढ़ते
हुए, प्रतिभा सेतु आयोग की बदलती
भूमिका को दर्शाता है—सिर्फ भर्ती एजेंसी के रूप में
नहीं, बल्कि मानव संसाधन विकास के सक्रिय भागीदार
के रूप में। यह
न केवल उम्मीदवारों के
लिए लाभकारी है, बल्कि नियोक्ताओं
के लिए भी एक
रणनीतिक अवसर है।
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